"येशु की भविष्यवाणी: अंत समय के संकेत और उसकी दूसरी आगमन" मत्ती 24:1-51#shorts #youtube #ytshorts

15 days ago
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"येशु की भविष्यवाणी: अंत समय के संकेत और उसकी दूसरी आगमन" मत्ती 24:1-51#shorts #youtube #ytshorts describe in hindi.
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मत्ती 24:1-51 में यीशु ने अंत समय, महान संकट (महाक्लेश) और अपनी दूसरी आगमन के बारे में भविष्यवाणी की। इसे "ओलिव पर्वत प्रवचन" भी कहा जाता है, क्योंकि यीशु ने ये बातें जैतून पर्वत (माउंट ऑफ ऑलिव्स) पर बैठकर अपने शिष्यों से कहीं।

1. मंदिर का विनाश (मत्ती 24:1-2)
यीशु भविष्यवाणी करते हैं कि यरूशलेम का भव्य मंदिर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। यह भविष्यवाणी 70 ईस्वी में पूरी हुई जब रोमियों ने मंदिर को नष्ट कर दिया।

2. अंत समय के संकेत (मत्ती 24:3-14)
शिष्य पूछते हैं कि अंत समय और यीशु के आगमन के संकेत क्या होंगे। यीशु बताते हैं कि:

झूठे मसीह आएंगे और बहुतों को भ्रमित करेंगे।
युद्ध और युद्धों की अफवाहें होंगी।
भूकंप, अकाल और महामारी आएंगे।
विश्वासियों पर अत्याचार किया जाएगा और वे मारे जाएंगे।
अधर्म बढ़ेगा, और बहुतों का प्रेम ठंडा पड़ जाएगा।
लेकिन राज्य का सुसमाचार (गुड न्यूज) सारी दुनिया में प्रचारित होगा, तब अंत आएगा।
3. महान संकट (महाक्लेश) (मत्ती 24:15-28)
यीशु चेतावनी देते हैं कि जब "घृणित उजाड़ने वाली वस्तु" (Abomination of Desolation) पवित्र स्थान में दिखाई देगी, तब बहुत बड़ी विपत्ति आएगी।

जो यहूदिया में होंगे, वे तुरंत पहाड़ों की ओर भागें।
संकट इतना भयंकर होगा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
यदि परमेश्वर ने उन दिनों को न घटाया होता, तो कोई बचता ही नहीं।
झूठे मसीह और झूठे नबी बड़ी चमत्कारी बातें दिखाएंगे, लेकिन विश्वासियों को धोखा नहीं खाना चाहिए।
4. यीशु का दूसरा आगमन (मत्ती 24:29-31)
महाक्लेश के बाद, यीशु का पुनः आगमन होगा:

सूर्य और चंद्रमा की रोशनी मंद पड़ जाएगी।
तारे आकाश से गिरेंगे।
फिर "मनुष्य का पुत्र" (यीशु) महिमा और सामर्थ्य के साथ आएगा।
स्वर्गदूत अपने तुरही की आवाज़ के साथ चुने हुए लोगों को चारों दिशाओं से इकट्ठा करेंगे।
5. जागरूक रहने की चेतावनी (मत्ती 24:32-44)
यीशु एक दृष्टांत (parable) बताते हैं:

अंजीर के वृक्ष से सीखो – जब उसकी टहनियाँ कोमल होती हैं और पत्ते निकलते हैं, तो गर्मी पास होती है। ऐसे ही जब ये घटनाएँ घटेंगी, तो यीशु का आगमन निकट होगा।
लेकिन कोई भी दिन या घड़ी नहीं जानता – न स्वर्गदूत, न बेटा (यीशु), केवल पिता परमेश्वर।
यीशु के आगमन को "नूह के दिनों" की तरह बताया गया है – लोग साधारण जीवन जी रहे थे, लेकिन अचानक जलप्रलय आ गया।
इसलिए, हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए, क्योंकि यीशु किसी भी समय आ सकते हैं।
6. विश्वासयोग्य और अविश्वासयोग्य दास की दृष्टांत (मत्ती 24:45-51)
यीशु एक और दृष्टांत देते हैं:

एक अच्छा और समझदार सेवक अपने स्वामी के आने तक ईमानदारी से कार्य करता है, इसलिए उसे इनाम मिलता है।
एक दुष्ट सेवक सोचता है कि उसका स्वामी देर से आएगा, और वह अनुचित आचरण करता है, इसलिए उसका कठोर दंड होता है।
इस दृष्टांत का संदेश साफ़ है: यीशु का आगमन निश्चित है, लेकिन समय अज्ञात है। इसलिए, हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए।
निष्कर्ष:
मत्ती 24 अध्याय हमें याद दिलाता है कि यद्यपि संसार में संकट आएंगे, परमेश्वर का नियंत्रण सब पर है। यीशु के अनुयायियों को सतर्क, विश्वासयोग्य और तैयार रहना चाहिए, क्योंकि उनका दूसरा आगमन अचानक और निश्चित रूप से होगा।

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