"आकाश के पक्षियों का उदाहरण" मत्ती 6:26 |#shortsvideo #shorts #youtubeshorts #yt #youtube

6 months ago
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"आकाश के पक्षियों का उदाहरण" मत्ती 6:26 |#shortsvideo #shorts #youtubeshorts #yt #youtube
मत्ती 6:26 का एक सुंदर और गहन अर्थ है, जो हमें परमेश्वर की देखभाल और हमारे जीवन में चिंता को छोड़ने की शिक्षा देता है। आइए इस पद को विस्तार से समझते हैं।

पद:
"आकाश के पक्षियों को देखो: वे न तो बोते हैं, न काटते हैं, न भंडारों में इकट्ठा करते हैं, फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन्हें खिलाता है। क्या तुम उनसे अधिक मूल्यवान नहीं हो?"

संदर्भ और महत्व
संदर्भ:

परमेश्वर पर भरोसा: यह पद यीशु के पर्वत उपदेश (Sermon on the Mount) का हिस्सा है, जहां वे अपने अनुयायियों को चिंता और भौतिक चिंता से मुक्ति के बारे में शिक्षा देते हैं। इस विशेष अंश में, यीशु यह बताना चाहते हैं कि हमें रोज़मर्रा की जरूरतों को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए क्योंकि परमेश्वर हमारी देखभाल करते हैं।

पक्षियों का उदाहरण: यीशु ने पक्षियों का उदाहरण देकर यह समझाने की कोशिश की है कि यदि परमेश्वर पक्षियों की देखभाल कर सकते हैं, तो वह निश्चित रूप से मनुष्यों की देखभाल करेंगे, जो उनके लिए और भी मूल्यवान हैं।

आध्यात्मिक महत्व:

चिंता का त्याग: यह पद हमें चिंता छोड़ने और अपनी आवश्यकताओं के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने के लिए प्रेरित करता है। जीवन की कठिनाइयों के बावजूद, विश्वास के साथ जीना संभव है।

परमेश्वर की देखभाल: यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर हर प्राणी का ध्यान रखते हैं। अगर हम उनके ऊपर विश्वास रखें, तो वे हमारी देखभाल करेंगे जैसे वे प्रकृति के अन्य प्राणियों की करते हैं।

मूल्यवानता की भावना: यह पद यह भी सिखाता है कि मनुष्य परमेश्वर की नजर में बहुत मूल्यवान हैं। यह हमारे आत्म-सम्मान और आध्यात्मिक पहचान को बढ़ावा देता है, यह दर्शाते हुए कि हम परमेश्वर के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

व्यावहारिक उपयोग:

वर्तमान में जीना: हमें यह सीखने की जरूरत है कि वर्तमान में कैसे जिया जाए और भविष्य के बारे में चिंता न की जाए। पक्षी भविष्य की चिंता नहीं करते, और उसी तरह हमें भी वर्तमान का आनंद लेने की आवश्यकता है।

विश्वास का अभ्यास: यह पद हमें हर दिन अपने विश्वास को मजबूत करने और यह विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करता है कि परमेश्वर हमारी हर जरूरत को पूरा करेंगे।

आभार और संतोष: यह हमारे दिल में आभार और संतोष की भावना विकसित करने में मदद करता है, यह जानकर कि हमारे पास जो कुछ भी है वह परमेश्वर की कृपा से है।

सांस्कृतिक संदर्भ
भारतीय समाज में, जहां अक्सर भौतिक सफलता और सुरक्षा के लिए जोर दिया जाता है, यह पद आध्यात्मिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह लोगों को यह समझने में मदद करता है कि सच्ची खुशी और शांति बाहरी चीजों से नहीं बल्कि परमेश्वर पर विश्वास से आती है।

सारांश
मत्ती 6:26 हमें जीवन की चिंता से मुक्त होने और परमेश्वर पर अपने विश्वास को मजबूत करने की शिक्षा देता है। यह हमें सिखाता है कि कैसे हमारे जीवन की प्राथमिकताओं को व्यवस्थित किया जाए और परमेश्वर की अद्भुत देखभाल में विश्वास किया जाए। पक्षियों का उदाहरण यह दर्शाता है कि अगर वे बिना किसी चिंता के जी सकते हैं, तो हम भी परमेश्वर की देखभाल पर भरोसा करके एक संतुलित और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
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