मुट्ठी पीर की साधना - जीवन बदल जाएगा इन्हें सिद्ध करने के बाद

1 year ago
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मुट्ठी पीर साधना
॥ मंत्र ॥
बिस्मिल्लाह अर्रहमान निर्रहीम।
साह चक्र कि बावड़ी।
गले मोतियन का हार।
लंका सो कोट समुन्द्र सि खाई।
जहां फिरे मोहमदा वीर कि दुहाई।
कौन वीर आगे चले।
सुलेमान वीर चले।
दर्शनी वीर चले।
नादिरशाह वीर चले।
मुठी पीर चले।
नहीं चले तो हजरत सुलेमान कि दुहाई।
शब्द साँचा।
पिंड कांचा।
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

विधि: गुरुवार के दिन इस मन्त्र का अनुष्ठान शुरू करना है। ४० दिन का अनुष्ठान होगा ओर प्रतिदिन २१ माला जपनी है। पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर ये सब अनुष्ठान करने है। ४० दिनों में कभी भी पीर दर्शन दे सकते है। उनको प्रसन्न करके मनचाहा कार्य करवाया जा सकता है।

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